a Hindi poems written in hindi means hindi kavita.

#12-एक कदम

दे दिया एक कदम दुनिया भर को, अगर है दम तो बढ के दिखा एक कदम, राहों में बिछ गयी राहें खुल गए कई चौराहे, निकाल ले तू अपने लिये…

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#11-एक तरकीब

(EK TARKEEB) मोड कितने आते हैं राह में, हैं कितनें चौराहे, हर जगह संभलना सीखें, न जाएं जिधर मन चाहे। राह चुनने की सीखो तरकीब, है यह बडी अजीब, साधो उडती…

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#10-शरद बखानी

(Sharad Bakhani) पानी सरपत से सरकत जाए रे। ठंडी हवा का झोंका रोंवा कंपकंपाए रे, पानी सरपत से सरकत जाए रे। दूर तलक देखो कोई आश नहींं है, सूखा सा…

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#9-खयाली पुलाव

(Khayali Pulaw) खयाली पुलाव तो ऐसे पकते, जैसे बीरवल की खिचडी, मन में आई बात जो ठहरी, साफ दिखे हो खुली सी खिडकी। मन के उस एक झरोंखे से, निकले…

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#8-स्वार्थ

(Selfishness) घात लगाए बैठा है, इससे तू बच के रहना, हावी हो जाएगा तुझ पर, किसी धोखे में तू न रहना, सचेत किए देता हूँ अभी से, फिर किसी से…

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#7- अरमान (Desires)
dil ke armaan

#7- अरमान (Desires)

हम तो तनहा दूर ही थे तुमसे, बस दिल में पास आने के अरमान जागे तो थे, रह गए इतने पीछे हम वक़्त, बेवक़्त  कदम मिलाने को भागे तो थे।…

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#6-क्या मुझे हक़ नहीं?
Bakhani Hindi Poems

#6-क्या मुझे हक़ नहीं?

(Deshbhakti poem in hindi- Do I not DESERVE?) ज़िन्दगी के पहलू क्यूँ इतने उलझे से लगते है? क्या चेताती आसमान से गिरती वो आग कश्मीर में, क्यों आखिर किसी हुद…

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#5-विज्ञान – एक अभिशाप
Bakhani Hindi Poems

#5-विज्ञान – एक अभिशाप

(Hindi Poems Title- Science: A Curse) इस दुनिया में रहनें वालों ने, मौत की सेज सजाई, दिन – प्रतिदिन यह सेज हाँ सुन लो, लेती है अंगड़ाई। पल – पल…

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#4-क्या-हम-आजाद-हैं
hindustan india bharat

#4-क्या-हम-आजाद-हैं

देश हुआ आजाद हुए अब, हो गए हैं दिन इतने, जो सच पूछो तो दिल से बोलो, आजाद रहे तुम दिन कितने, पहले था अंग्रेज का शासन, कर लगता था…

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#3-बखानी-एक परिचय
the introduction of bakhani

#3-बखानी-एक परिचय

(Bakhani: An Introduction) बखानी संग्रह उन बातों का, जिन बातों को सब जानते हैं, अच्छा बुरा पहचानते हैं, फिर भी बातें नहीं मानते हैं। सुननेे में अच्छी लगती हैं, अनुसरण…

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#2-मन अशांत पक्षी का कलरव।
मन अशान्त पक्षी का कलरव

#2-मन अशांत पक्षी का कलरव।

(Hindi Poems on Man Ashant Pakshi Ka Kalrav) मन अशांत पक्षी का कलरव। पतझड़ फैला फूला शेमल, हलचल फैली फुदक गिलहरी, कोयल कूके गीत सुहाना, देख अचंभित प्रकृति का रव…

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