#47 कटी पतंग सी कहानी मेरी

कटी पतंग सी कहानी मेरी!
न ठौर है न ठिकाना रुकने का,
हवा के झोंके से इधर-उधर हो जाए,
बीत गए बचपन के वो दिन,
देखते भटकते बीतती जवानी मेरी,
कटी पतंग सी कहानी मेरी ।

हवा का रुख अख्तियार किए,
अपनाए अपनी अच्छी बुरी किस्मत को,
ढूंढते हुए यूँ हि मन की चाह अपनी,
भटकते भटकते बीतती जवानी मेरी,
कटी पतंग सी कहानी मेरी ।

हर मोड में राह के मिलती यूँ ठोकर,
खुदा नें दी रंजिश खुद की जिन्दगानी से,
जिन्दगी की रंजिश में खुद को पीसता हुआ,
हर बात अटकती बखानी मेरी,
कटी पतंग सी कहानी मेरी ।


–>सम्पूर्ण कविता सूची<–


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Bakhani, मेरे दिल की आवाज – मेरी कलम collection of Hindi Kavita

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Bakhani hindi kavita मेरे दिल की आवाज मेरी कलम

This hindi kavita contains the mirror image to the life with real life experience. Hindi poems are in the form of MUKTAK, Which may follow the ras, chhand, alankaar and matra rool or may not be.

Poem on life

A poem on life is the real experience and feelings in the society. This poem express the life as a mirror image about experience.

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[…] <<- 47 कटी पतंग सी कहानी मेरी […]

jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।