a Hindi poems written in hindi means hindi kavita.

#24-RET KE DARIYA

मैंने रेत का दरिया मुठ्ठी बाँधी। जग में यूँ हि राह चलूं, विश्वास समय के साथ चलूं, पर समय का पहिया आगे काफी, न पाऊँ दिन रात चलूँ, मैं भूल…

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#23-BUNDELKHAND

न देखी किसी ने दशा वो मेरी, बस हंसते रहे मुस्कुराते रहे, मेरी दशा को उथला दिखा, जग को धता बस दिखाते रहे, दिखता है जो क्या बस वो सच…

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#22-ओ माँ

CONTENT MISSING SOME PROBLEM OCCUR WITH THIS PAGE COME BACK LATER..... तुझे मेरी हर पल जो चिन्ता रहती है, आंखो के नीचे की सुर्ख झुर्रियां कुछ कहती हैं, इक शान्त…

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#21-दृढ बनो

निकला था अलि भ्रमर में अंजानें मंजिल की खोज, दिल में आश लगाए भटके, मन में मंजिल पानें की सोंच, राह भटकते रात हुई वह वह लौट पडे निज गृह…

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#20.किसान और प्रकृति
hindi k avita

#20.किसान और प्रकृति

निर्बल दुर्बल खेतिहारी पर,सूखे की मार भारी है,पकी फसल पर वारिस पत्थर,और भी प्रलयंकारी है।वह झूल रहा है फंदो से,रब रूठ गया है बंदो से,ऐ रब अब तू सुन ले…

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#19.हैप्पी होली
happy holi

#19.हैप्पी होली

इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी यह होली। रंगो की वह होली अब फीकी फीकी सी है, सहमी इंसानियत हर पल दूजे से, न पता किधर से रोष…

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#18-गौरैया The sparrow
gauraiya, sparrow

#18-गौरैया The sparrow

  सुन गौरैया वर्षों पहले मेरा आंगन महकाती थी, मेरा बचपन फुदक तेरे संग, उछल कूद सिखाती थी, डालूं दाना आंगन में जितने, तू आ के चुंग जाती थी, मेरे…

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#17-महिला सशक्तिकरण

महिला दिवस आज की नारी -नारी सशक्तिकरण समाज की कुरीतियों से अब, लड़ना हमनें सीख लिया, फटेहाल समाज का मुह, सिलना हमनें सीख लिया, हक़ की हो जब बात तो,…

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#16-गुण्डागर्दी

(GUNDAGARDI) गुण्डागर्दी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, मारना बस मारना है, खर्चा नेताओं के बिल में है। वो पैसे देंगे हम मारेंगे, नहीं रुकेंगे हाँथ हमारे, नाम होगा…

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#15-हमारी आश

राह से गुजरते हर राहगीर से हमनें आश लगाई है। जमाने के शिले नें हमें यूँ हि भटकता छोड दिया, दो वक्त की रोटी को यूँ हि तरसता छोड दिया,…

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#14-क्यों न लगें बोझ बेटियाँ

माँ बाप की लाडली बेटी, समझदार जब थोडी होती, दुनियादारी का बोझ सर ले, दुनिया को कंधों पे ढोती, आज का ये समाज सातिर, खुल के नहीं जीने देता, ढाई…

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#13-ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं

ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं। हरियाली मैं तुझे संजोऊँ। पीढी दर पीढी घटती जाए, मूढ कहे तू काम न आए, वो अज्ञानी तुझे मिटाए, अकेला समझाऊँ समझ न आए, मत…

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