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BAKHANI Posts

#55 चित- मन का लहरी

 

मन का लहरी सज संवर कर,
स्वच्छन्द जहां विचरण करता,
सार्वभौम जो सत्य जहां पर,
जाने कौन कब कैसे तरता,
चलते फिरते खडे खडे यूं,
बातों बातों अन्तिम मंजिल आ जाती,
जीत पलों को उस छण में फिर,
काहे सोंचता क्या करता क्या न करता,
मन का लहरी सज संवर कर,
स्वच्छन्द जहां विचरण करता।

कर कर्म जहां पर सुविचार संग,
परोपकार की मंसा रख कर,
स्वारथ पहलू सिक्का है दूजा,
प्रतिपल प्रतिक्षण परस्वारथ कर,
ईश्वर भी सब देख रहा है,
मन को ऐसा विश्वास दिला कर,
नेक कर्म से नेक भाव से,
क्यों न अपना घट पुण्य से भरता।

जब चिडिया चुग जाती खेत,
जग पछताता आहें भरता,
दूध का जला फूंक कदम रख,
छाछ मुख लगाने से डरता,
तज माया ऊपर वाले पर,
निःस्वारथ बस करम जग करता,
मन का लहरी सज संवर कर,
स्वच्छन्द जहां विचरण करता।

 


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Poem on Heart

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Explanation of Hindi poem on Mind

यह हिन्दी कविता जो दिल और दिमाग की व्यथा की व्याख्या करने का प्रयास करती है । #Hindi poem on heart #poem on mind #heart listener

A hindi poem on heart and mind

A hindi poem on heart and heart-listener expressing the thought how HEART and mind want to travel fearless. Therefor enjoy the hindi poem bellow.

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#54 दिल्ली दंगा

काश्मीर से हटी क्या धारा तीन सौ सत्तर,
भडकाकर लोगों को दिल्ली पर बरसा दिया पत्थर,
जमाना बेबाक निष्ठुर ढंग से देखता रह गया,
और जमाने ने जमाने को आइना दिखला दिया ।

घरौंदे जब आइने के बने होते हैं,
शदियों से तहजीब जब कंधे ढोते हैं,
संभल कर पग रखना होता है घर से निकल कर,
जमाने को एक बार फिर जमाने नें बतला दिया ।

मशहूर है पत्थर को तबियत से उछाल कर देखो,
तो आसमां में भी सुराख हो सकता है,
देश जाने कब विकास की राह पर चला,
जमाने ने जमाने को ही सर-ए-आम झुठला दिया ।

 


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Explanation of Hindi poem on Delhi Riots

यह हिन्दी कविता एनआरसी और सीएए (NRC and CAA)  के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की व्याख्या करनें का एक प्रयास मात्र है । हिन्दी साहित्य के माध्यम से जम्मू और कश्मीर में हुई पूर्व की घटनाओं और दिल्ली हिंसा के अन्तर्गत हुई हिंसाओं को एक तराजू में रख कर यदि देखा जाए तो बहुत सारी समानताएं देखनें को मिलती हैं । देश में किस प्रकार का माहौल बन रहा है या बनाया जा रहा है, अत्यन्त दुःखद है । Poem on Delhi #poem on nrc #Poem on caa hindi poems

A Hindi Poem on Delhi Riots

Find various hindi poems. This is a poem on delhi roits expressing thought for the time of oppose of caa and nrc and support of sahinbagh in delhi.

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#53 स्मृति

क्यों स्मृति यूँ सताती।
जग में न कोई वैरी दूजा,
पल में रुलाती पल में हसाती,
पल में मजबूर सोंचनें को करती,
हर पल यह एहसास जताती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

कहती खुद को जीनें का जरिया,
झील समन्दर से भी गहरी यह दरिया,
बिन घुंघरू बाजे यह झांझर,
चुप रह कर भी शोर मचाती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

एक तो ढोल नगाड़े बाजे,
दूजे नामदेव की स्मृति बाजे,
कर देती हर पल हैरान,
काज सकल व्यरथ बेकार बताती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

 


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Explanation of the poem on memory

This hindi poem explain the thoughts about the memory as memory hurts the mind and heart by remembering the good and bad happening of the life. Memory always gives the power to maintain the happening and miss-happening in life. Always memory a part of life gives an example to overcome the bad dreams about the miss-happening in life. Memory always stored in mind either in the form of hidden of open mode. Mind stores every moment of life in the form of memory.

Poem on memory

स्मृति पर हिन्दी कविता

Hindi Poem on Memory

Read the hindi poem on memory. स्मृति is the word in hindi expressing the hypothysis of memory. This poem express the thoughts.

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#52 हिन्दुस्तान

फतवे लगते हैं तो लगनें दो ।

मुझे गुरेज नहीं ठेकेदारों से,
नहीं परवाह मुझे कौम किरदारों से,
मैं हिन्दुत्व पर भी चाहे गर्व न करूं,
पर परहेज नहीं भारत जय के नारों से।

कुछ जन्म से कहते खुद को वासी,
कुछ कहते वासी खुद को इच्छा से,
मैं दिल से भारतवासी हूं,
दिल गूंजता है भारत के जयकारों से।

सीखा है आदर सम्मान की भाषा,
छोंड धर्म का चश्मा सब सींखेंगे है आशा,
निज हित निज स्वारथ और लालच,
बच के रहना दिल के इन गद्दारों से।

ऐ जमी तू जल मुझे चलनें से परहेज नहीं,
गर जलेगी दुनिया संग मुझे जलनें से परहेज नहीं,
आजादी को जाति धर्म की खूब लडी लडाई,
खूब सीख मिली है देश की सरकारों से।

बहन बेटी जब जलती मरतीं दरिंदे खुले आम घूमते हैं,
घर बैठे सारे प्रबुद्धजन देख के टीवी बस उफ करते हैं,
बेटी को शिक्षा दे दो चंगा बेटों को मत वंचित करो,
गर बेटा दरिंदा है तो चुनवा दो उन्हें दीवारों से ।

 

 

 


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कविता को https://www.youtube.com पर मेरे चैनल में भी देख सकते हैं-

हिंदी कविता का अमर उजाला काव्य में प्रकाशन

कविता अमर उजाला के काव्य सेक्शन में चयनित की गयी है।  जिसका लिंक  है https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/bakhani-hindi-hindustan “हिन्दुस्तान ” पर हिन्दी कविता

Hindi poem on hindustan

This poem on hindustan explains the thought about the current situation arises here in country INDIA. Hindustan is now on trouble. everyone. 

इस हिंदी कविता के माध्यम से मजहबी भेदभावों को परे रख देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देनें की बात कहनें का एक प्रयास किया गया है ।

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#51 स्वागत (welcome) 2020

साल का दिन आखिरी था,
खयालों में खो के बिताया है,
जो साल भर संग हुआ,
सोंचा क्या खोया क्या पाया है।

अभी कुछ पलों के बाद,
ईशवी सन नया आयेगा,
दिन तीन सौ पैसठ,
इसी इंतजार में बिताया है।

नई सुबह जो आएगी,
साल नया ले आएगी,
बीत गया दो हजार उन्नीस,
दो हजार बीस अब आया है।

जो बीता है सुख भरा,
नया भी खुशियां ही लाएगा,
लड किस्तम की लकीरों से,
हर पल नया मुकाम पाया है ।

एक बार फिर नये के इन्तजार में,
दिन तीन सौ छाछठ बिताऊंगा,
हर दिन हर पल अब तक जैसे,
जीत मौज में बिताया है ।

 


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नये वर्ष 2020 का गर्मजोशी के स्वागत

इस हिन्दी कविता के माध्यम से नये साल का स्वागत बडी ही गर्मजोशी के साथ करनें का प्रयास किया गया है । पुराने वर्ष की यादों को संजोते हुए एवं वीते समय में मिले दुःखों को दर किनार करते हुए नए वर्ष में सुख की असीम अनुकम्पा के साथ आश रखे हुए स्वागत है ।


HAPPY NEW YEAR 2020

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Warm Weocome 2020

Hindi poem on New year 2020, it is a hindi poem expressing the thoughts about the passing year 2019 and new year 2020. A warm welcome to 2020

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