Home hindi poems #3-बखानी-एक परिचय
hindi poems

#3-बखानी-एक परिचय

Bakhani Introduction

Bakhani बखानी संग्रह उन बातों का,
जिन बातों को सब जानते हैं,
अच्छा बुरा पहचानते हैं,
फिर भी बातें नहीं मानते हैं।

सुननेे में अच्छी लगती हैं,
अनुसरण करनें को लगती हैं,
पर देख जमाना करते हैं,
दिल की करनें में डरते हैं।

डरते हैं “वो क्या कहेंगे”,
अपने दिल की कब करेंगे
मान के अपने दिल की देखो,
लोग “मिशाल” बतलाते हैं।

साफ स्वच्छ यह आइना है,
सब सम्मुख ही दिखलाता है,
करी शरारत या कोई गलती,
शर-ए-आम बतलाता है।

यदि चाहोगे आगे बढना,
खुली राह दिखलाता है,
यह मनचित्र का संग्रह है,
बखानी जीवन तथ्यों का संग्रह है।

https://youtu.be/A5KZ5RSSVos

An Introduction to Bakhani

Bakhani is the collection of those things,
Which are known very well by every one,
Understand the right and the wrong,
Even though do not follow the things.

Attractive in listening,
Looks like to follow,
but do as the World want,
Have fear to do as thinking.

Have fear what the World will say,
when will do of think,
do as really think,
“Ideal” the world will say.

Its a clean and clear mirror,
Every thing shows in front,
did any mistake,
It said openly.

If want to go forward,
shows the way openly,
It is the collection of Think-paint,
Bakhani is the collection of Facts of Life.

Originally published - http://bakhani.com/hindipoems/bakhani-introduction/

#bakhani

#hindi poems


4 क्या हम आजाद हैं->>

सम्पूर्ण कविता सूची

<<-#2 मन अशान्त पक्षी का कलरव


Facebook link

बखानी हिन्दी कविता के फेसबुक पेज को पसंद और अनुसरण (Like and follow) जरूर करें । इसके लिये नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें-

Bakhani, मेरे दिल की आवाज – मेरी कलम collection of Hindi Kavita

Youtube chanel link

Like and subscribe Youtube Chanel

Bakhani hindi kavita मेरे दिल की आवाज मेरी कलम

(Bakhani: An Introduction)

As the name explains there is no need of introduction of Bakhani, a collection of hindi poems. Life explains with the mirror and shaddow.

Total Page Visits: 2356 - Today Page Visits: 3

Author

jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

Join the Conversation

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get 30% off your first purchase

X