#40- भागे तो थे

Poem on reality

हम तो तन्हा दूर ही थे तुमसे,
बस दिल में पास आने के अरमान जागे तो थे,
रह गये इतने पीछे हम वक्त,
बेवक्त कदम मिलाने को भागे तो थे ।

बिछड जाने के डर ने जकड रखा था,
डर से निकलने को यूं क्या करता अकेला,
जीत दिल के डर को भांप कर,
समन्दर के उन किनारों को झांके तो थे।
समन्दर की लहरों में ताकत वो थी,
जीतनें को उस डर से भीगे तो थे ।

राहों में यूं बढ कर पीछे रह गये,
दिल में अरमान संग चलने के थे,
कोशते हैं खुद को हम पीछे,
तुम बस थोडा आगे तो थे ।

 


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मन के भावों को प्रकट करनें का एक प्रयास जिसमें शब्दों के माध्यम से नजदीकी व दूरी को दर्शानें का प्रयास किया गया है। मनोभावों के माध्यम से दिल के अरमानों को व्यक्त किया गया है । बिछड जाने के डर ने जकड रखा था, डर से निकलने को यूं क्या करता अकेला, जीत दिल के डर को भांप कर, समन्दर के उन किनारों को झांके तो थे। समन्दर की लहरों में ताकत वो थी, जीतनें को उस डर से भीगे तो थे ।

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