#29-ढूंढते रह जाओगे

#29-ढूंढते रह जाओगे

अब की शदी में यार ढूंढते रह जाओंगे ।

देश भक्त और नेता सच्चा,
माँ का दूध कमाऊ बच्चा,
शरीफों के गले में हार,
ढूंढते रह जाओगे।

गुरू सच्चा शिष्य आज्ञाकारी,
नेक पति पतिवृता नारी,
भाई का मधुर दुलार,
ढूंढते रह जाओगे।

निर्मल नीर ज्ञान अरु ज्ञानी,
संत महंत दान अरु दानी,
अंखियां पानीदार,
ढूंढते रह जाओगे।

मर्द की मूँछ सास की चादर,
बहू का घूंघट बडों का आदर,
नारी के लम्बे बाल,
ढूंढते रह जाओगे।

रीति रिवाज विवाह की रश्में,
जीवन भर साथ निभानें की कश्में,
हरा भरा परिवार,
ढूंढते रह जाओगे।

पीने को दूध खानें को मेवा,
जवानी का जोश बुढापे की सेवा,
जग में परोपकार,
ढूंढते रह जाओगे।

राधा सा प्रेम भरत सा भइया,
सुदामा सा मित्र पन्ना सी मइया,
वो गीता का सार,
ढूंढते रह जाओगे।

अमर शहीदों की वो मर्जी,
सच कहते हैं बुद्धू दर्जी,
कविता के उच्च विचार,
ढूंढते रह जाओगे।

यह कविता मेरे मामाजी श्री बुद्धराज नामदेव द्वारा लिखी गयी है ।

 


–>सम्पूर्ण कविता सूची<–


ढूंढते रह जाओगे एक हिन्दी कविता

इस हिंदी कविता के माध्यम से इस जग की कुछ ऐसी बातों का उल्लेख किया गया है जो आज लगभग विलुप्त सी हो गयी हैं। इस संसार में जैसे कि हम कहानियों और किंबदंतियों में सुनते हैं कि हमारे पूर्वज एक दूसरे का सम्मान आदर करनें में कोई कोर कसर नहीं छोंडा करते थे पर आज के इस मोबाइल दुनिया में यह भी खो सा गया है। पाश्चात्य शैली के आगमन और उसके अनुसरण के फलस्वरूप आज की यह कैसी दुनिया है।

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jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।