#7- अरमान

poem on desire
हम तो तनहा दूर ही थे तुमसे,
बस दिल में पास आने के अरमान जागे तो थे,
रह गए इतने पीछे हम वक़्त,
बेवक़्त  कदम मिलाने को भागे तो थे।
बिछड़ जाने के डर नें जकड रखा था,
डर से निकलनें को यूँ क्या करता अकेला,
जीत दिल के डर को भांप कर,
समन्दर के उथले किनारों को झांके तो थे।
समन्दर की लहरों में ताकत वो थी,
जीतनें को उस डर से भीगे तो थे।
राहों में यूँ बढ़ कर पीछे रह गए,
दिल में अरमान संग चलनें के थे,
कोशते हैं खुद को हम पीछे,
तुम बस थोडा आगे तो थे।
हम तो तनहा दूर ही थे तुमसे,
बस दिल में पास आनें के अरमान जागे तो थे।

#bakhani
#hindi poems

 


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Explanation of the poem on desire

This hindi kavita on desire express the thoughts to stay and move with partner while he or she is just a step ahead.

 

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(Desires)

Poem on Desire in Hindi

poem on desire in hindi or Armaan is a poem expressing the thoughts. अरमान दिल की तमन्ना को व्यक्त करती एक हिन्दी कविता है –
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