Home Chhand (छंद), hindi poems गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी के कुछ अंश
Chhand (छंद)hindi poems

गोस्वामी तुलसीदास की जीवनी के कुछ अंश

Tulsi (Tulsidas) Janmotsav

Tulsi Janmotsav (Tulsidas) गोस्वामी तुलसीदास जी की जीवनी के कुछ अंश पर आधारित एक छंद बद्ध रचना।

 

[wpdiscuz-feedback id=”lfwbk6rhen” question=”उक्त छंदबद्ध रचना आपको कैसी लगी?” opened=”0″]

चौपाई

आत्मज आत्मा हुलसी के थे, ये नाथ रत्नावली के थे।
जन्मे कालिंदी के तट पर, शिक्षा पायी सरयू तट पर।।

दोहा

नाम  रामबोला  मिला,  गुरु  सरयू  तट  लाय।
राम कथा गुरुमुख श्रवण, मय गुरु सोरो आय।।

चौपाई

आए काशी सुरसरि तट पर, गहन अध्ययन गूढ़ मनन पर।
गए   प्रेम  में  दरश  कुटीरा, प्राणपियारी    प्रेम   अधीरा।।

कुंडलिया

हाड मास कह पोटली, हृदय लगाया घात।
कटु सत्य पर मनन तुरत, मन जागा वैराग।
मन   जागा  वैराग, सीधे  प्रयाग  को आए।
भक्ती करी अनंत, हनुमत  चित्रकूट  पाए।
जीता  मन विश्वास, श्रीप्रभु   सम्मुख  आए।
घस चंदन घाट तट, रघुवीर तिलक लगाएं।।

दोहा

रामचरित का गान रच, किया सकल उद्धार ।
हे  तुलसी साहित्य हित,  उतरो     बारंबार ।।

[/wpdiscuz-feedback]

 


–>सम्पूर्ण कविता सूची<–


Tulsi Janmotsav तुलसी जन्मोत्सव

तुलसी जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में दोहा, चौपाई एवं कुण्डलिया छन्द का प्रयोग करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी की जीवनी के कुछ अंश पर आधारित छंद रचना।

Facebook link

बखानी हिन्दी कविता के फेसबुक पेज को पसंद और अनुसरण (Like and follow) जरूर करें । इसके लिये नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें-

Bakhani, मेरे दिल की आवाज – मेरी कलम collection of Hindi Kavita

Youtube chanel link

Like and subscribe Youtube Chanel

Bakhani hindi kavita मेरे दिल की आवाज मेरी कलम

Hindi Kavita in Tanka Pattern titled chand

Kavita on chand in Tanka Pattern

जुडें मेरी फेसबुक मित्र सूची में

मेरी मित्र सूची जुडनें के लिए नीचे दिये लिंक पर क्लिक करें व अपनी मित्रता सूची में जोडें तथा साहित्य का आनन्द लें। साहित्य की ओर प्रयासरत रह कर विभिन्न विधाओं में प्रयास है इस वेबसाइट में।

Jitendra Kumar Namdeo- जितेन्द्र कुमार नामदेव

Total Page Visits: 38639 - Today Page Visits: 2

Author

jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

Join the Conversation

  1. goswami tulsidas ji ki jivani se sabhi chhatro ko parichit hona chahiye. Ek aisa udaharan hai ki gyan prapt hona hi kaafi nahi ishwar prapti k liye. man me vairaag and purn samarpan ki ashwakta hoti hai.
    pothi padhe n jag mua,
    pandit bhaya n koi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get 30% off your first purchase

X