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Bakhani

Bakhani Posts

#36-बेरोजगारी

बेरोजगारी का यह आलम,
दुनिया का हर कोना है,
पढो लिखो फिर दर दर भटको
युवाओं का यह रोना है ।

राजस्व वसूली अच्छी खासी
सिस्टम में यह चूक है,
रोजगार स्वरोजगार छलावा
हार जीत की दो टूक है,
पढा लिखा से अऩपढ अच्छा,
मेहनत करता हलधऱ अच्छा,
पढ लिख कर कलम है पकडी
असमंजस क्या बुरा क्या अच्छा,
हांथ सफाई मन बहलाई
सब राजनीति सिखाती है,
देख के रंग गिरगिट जैसा
लगता सच्चा जादू टोना है,
बोरोजगारी का यह आलम,
दुनिया का हर कोना है,
पढो लिखो फिर दर दर भटको
युवाओं का यह रोना है ।

बातें बडी भाषण में दिखती
मन विश्वास कर जाता है,
सच्चा झूठा कुछ समझ न आता,
हांथ कुछ नहीं लग पाता है,
वोट वसूली कर जब गद्दी पाते हैं
बातें वायदे सब भूल जाते हैं,
कुछ न कर बस इक दूजे की,
व सिस्टम की कमी बताते हैं,
पर फिर भी अपनी उपलब्धि को
बार बार गिनाते हैं,
व लालीपाप सा दिखलाकर जग में,
पकडाते कच्चा खिलौना हैं,
बोरोजगारी का यह आलम,
दुनिया का हर कोना है,
पढो लिखो फिर दर दर भटको
युवाओं का यह रोना है ।

क्यों लचर व्यवस्था को दोष देते
व्यवस्था आखिर किसकी है,
जिस सिस्टम की गुहार लगाते
जिम्मेदारी किसकी है
क्यों नीति नहीं नेतृत्व नहीं,
हर हाल युवा बेहाल है,
अपनी पाती मेज ठोंक कर मनवाते,
खुद बने जाते मालामाल है,
गोल मुट्ठा हांथ में रख कर
युवा को पकडाते तलवार तिकोना है,
आखिर संभल कर क्यों नहीं समझते,
यह कृत्य बडा घिनौना है,
बोरोजगारी का यह आलम,
दुनिया का हर कोना है,
पढो लिखो फिर दर दर भटको
युवाओं का यह रोना है ।

 


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#35-जीवन संघर्ष

कहते हैं कहने वाले कि,
जीवन को संघर्ष न मानो,
बहुत कुछ कर सकते हो,
तुम अपने को पहचानो,
पहचानूं भला कैसे अपने को,
कुछ सुझाया नहीं मुझे,
क्या क्या कर सकता हूं,
किसी ने बाताया नहीं मुझे,
बस कही इक बात कि
बात दिल की मानो
कहते हैं कहने वाले कि,
जीवन को संघर्ष न मानो।

 


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Hindi Poem on struggling life

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इस हिन्दी कविता के माध्यम से स्पष्ट करनें का प्रयास किया गया है कि इस दुनिया में जितनी मुह उतनी बातें होती हैं । परन्तु जीवन में संघर्ष का तात्पर्य और सही रूप वही जान पाता है जो वास्तविक संघर्ष कर जीवनयापन करता है। जीवन के विभिन्न पहलुओं में जीवन पर्यन्त विभिन्न प्रकार की यातनाएं मिलती हैं जिनको हर किसी को कभी न कभी किसी रूप में झेलना अवश्य पडता है।



 

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#33-पुलिस क्या है

पुलिस वह है जो हर जरूरत मंद के साथ खडी है
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो अपनी बात पे अडी है,
बडे से बडा अधिकारी हो या छोटा कर्मचारी,
खुद की आवश्यकताओं को तज है सिर्फ आज्ञाकारी,
हर विषम परिस्थिति जिसमे मानी हो सबने हार,
समाज मे दरिंदगी या गंदगी हर स्थिति में लडी है,
पुलिस वह है जो हर जरूरतमंद के साथ खडी है।

बेदाग से इस पुलिस के चेहरे पे लगे है दाग कभी,
सारी कुर्बानियो को भुला उस दाग के पीछे पड जाते हैं सभी,
क्यो भूल जाते है सब पुलिस वाला भी देश का नागरिक है,
शारीरिक और मानसिक आराम उसका भी हक है,
पर अपने आराम को तज हर पल तत्पर बात छोटी या बडी है,
पुलिस वह है जो हर जरूरतमंद के साथ खडी है।


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Hindi Poem on Police

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देश व समाज में पुलिस को लेकर सामाजिक प्रतिद्वन्द्वता हमेसा ही नजर आती रहती है। इस समाज में सर्वाधिक आलोचना को सहते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने वाली पुलिस देश व समाज की सेवा के लिए हर समय तत्पर रहती है। ऐसे में पुलिस की आलोचना करने वालों को इस कविता को पढना जरूरी है। समाज की सुरक्षा व सेवा के लिए अपना घर परिवार यहाँ तक कि अपना आराम तज कर भी पुलिस अपने कर्तव्य पथ पर काविज रहने वाली एक जटिल सेवा है। यदि सम्भव हो देश के हर नवयुवक को देश की सेवा व सुरक्षा हेतु एक नियत समय के लिए वर्दी पहनने का अवसर मिलना चाहिए इससे देश के प्रति जज्वा भी बढेगा व देश की सेवा करने वालों के प्रति सम्मान भी ।

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#32-मंजिल क्या है

ऐ पवन ! ठहर जरा,
बता तेरी मंजिल क्या है?
क्या तू कभी सोंचता है,
तेरे भाग्य लिखा क्या है?

ऐ सूरज! तू ठहर जरा,
क्यों बार-बार गुजरता है
तेरी मंजिल कहां छुपी है
क्या सच तुझको पता है
क्यों जग रोशन करता है
तू बता तेरी मंजिल क्या है

ऐ भौंरे रुक जा यहीं पर
क्यों हर पुष्प से आलिंगन करता है
क्या तूनें अपनी मंजिल नहीं चुनी है
सब कहते हैं सबकी मंजिल है,
ऐ भौंरे तू बता, तेरी मंजिल क्या है


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एक कहावत है कि इस दुनिया में जो कुछ भी है सबका रास्ता व मंजिल नियति के द्वारा पूर्व में ही तय है। प्रकृति की प्रकृति कभी एक संशय उत्पन्न कर देती है। उद्येश्य तो ठीक है कभी कभी समझ में आ जाता है परन्तु मंजिल तो समझ में ही नहीं आती। अपने इसी संदेह को दूर करनें के लिए प्रकृति से ही पूछे गये प्रश्नों की एक कडी है परन्तु ये प्रश्न निरुत्तर हैं । परन्तु इन्ही प्रश्नों के उत्तर से ही दुनिया में जीवन्त समस्त सजीव व निर्जीव की महत्ता का बोध होता है। एक सच्चा ज्ञान का प्रकाश मिलता है।

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