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Author: jk namdeo

मैं समझ से परे।

एकान्त वासी, अनुरागी,
ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी,
मैं समझ से परे।

दूजों संग संकोची,
पर विश्वासी,
कटु वचन संग,
मृदुभाषी,
मैं समझ से परे।

भोगी विलासी, इक सन्यासी,
परहित की रखता,
इक मंसा सी
मैं समझ से परे।

#3-बखानी-एक परिचय

बखानी संग्रह उन बातों का,
जिन बातों को सब जानते हैं,
अच्छा बुरा पहचानते हैं,
फिर भी बातें नहीं मानते हैं।

सुननेे में अच्छी लगती हैं,
अनुसरण करनें को लगती हैं,
पर देख जमाना करते हैं,
दिल की करनें में डरते हैं।

डरते हैं “वो क्या कहेंगे”,
अपने दिल की कब करेंगे
मान के अपने दिल की देखो,
लोग “मिशाल” बतलाते हैं।

साफ स्वच्छ यह आइना है,
सब सम्मुख ही दिखलाता है,
करी शरारत या कोई गलती,
शर-ए-आम बतलाता है।

यदि चाहोगे आगे बढना,
खुली राह दिखलाता है,
यह मनचित्र का संग्रह है,
बखानी जीवन तथ्यों का संग्रह है।

An Introduction

Bakhani is the collection of those things,
Which are known very well by every one,
Understand the right and the wrong,
Even though do not follow the things.

Attractive in listening,
Looks like to follow,
but do as the World want,
Have fear to do as thinking.

Have fear what the World will say,
when will do of think,
do as really think,
“Ideal” the world will say.

Its a clean and clear mirror,
Every thing shows in front,
did any mistake,
It said openly.

If want to go forward,
shows the way openly,
It is the collection of Think-paint,
Bakhani is the collection of Facts of Life.

Originally published - http://bakhani.com/hindipoems/bakhani-introduction/

#bakhani

#hindi poems


4 क्या हम आजाद हैं->>

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<<-#2 मन अशान्त पक्षी का कलरव


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Bakhani hindi kavita मेरे दिल की आवाज मेरी कलम

(Bakhani: An Introduction)

As the name explains there is no need of introduction of Bakhani, a collection of hindi poems. Life explains with the mirror and shaddow.

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#2-मन अशांत पक्षी का कलरव।

मन अशांत पक्षी का कलरव।
पतझड़ फैला फूला शेमल,
हलचल फैली फुदक गिलहरी,

कोयल कूके गीत सुहाना,
देख अचंभित प्रकृति का रव ,

मन अशांत पक्षी का कलरव।

फूल सुशोभित भांति वृक्ष में,
मृदु सुगंध फैली चौतरफा,

खुले तले इस नील गगन के,
भ्रमर भटक पर पाए न रव,

मन अशांत पक्षी का कलरव।

जीत हार दिल की सब बातें,
चंचल मन बस भटके यूँ ही,

कभी भटक कर आसमान पर,
कभी स्थिर जैसे कोई शव,

मन अशांत पक्षी का कलरव।

विचलित मन बस खोज में भटके,
भटके खोजे शांति – संतुष्टि,

भटके तांडव शंकर खेलें,
मटके-अटके जैसे भैरव,

मन अशांत पक्षी का कलरव।

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#3 बखानी एक परिचय->>

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(Hindi Poems on Man Ashant Pakshi Ka Kalrav)

This hindi poem on man as turbulent bird expresses the speed of mind in the world. Find hindi poem on mind.

Explanation of hindi poem on man:-

This hindi kavita on man expresses the thoughts about the turbulent mind. The turbulent mind is one getting the speed which can never controlled and measured. Mind is a word expressing the thoughts. Every weather every moment of life contains various natural events. The natural event like this increase the speed of mind and the way of thinking.

source:- http://bakhani.com/mypoems/un-calmed-bird/

#bakhani

hindi poem on man

#hindi kavita on mind

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#1–मा

मा बोले बेटे से :-


उठ बेटा दुनिया देख,
दुनिया देख रही तुझको,

मत जा ज्यादा दूर मा से,
ममता कह रही तुझको ।


बात-बात मे गुस्सा करके,
बेटा युं तेवर दिखलाये,

ममता से यू ओत-प्रोत मां,
ममता के जेवर पहनाये ।


चंद पंक्ती की तालीम पा कर,
बेटे माओ को ठुकाराये,

मा तो वह ही जो सबसे पहले,
उंगली थाम चलना सिखलाये ।


प्रथम पाठशाला की शिक्षा,
बेटे यू ही भूल जाये,

पर मा है वह एक जो,
कदम-कदम पर थमना सिखालये ।


याद करो बचपन ऐ बेटो,
मा के आन्चल मे छुप जाते,

करी शरारत या फिर गलती,
तोतली बानी मा को बतलाते ।


ममता की आन्चल से ढक कर,
मा यू  ही दुनिया से लड जाती,

दुनिय मे काले साये से बचने को,
जन्म से काला टीका लगाति ।


आज के बेटे दुनिय की चका- चौन्ध मे,
मा से यू हि लड जाते,

फिर थोडा सा झटका लगने से,
यू ठोकर खा कर गिर जाते ।


तब भी मा बेटे से यह ही कहती है :-


उठ बेटा दुनिय देख,
दुनिया देख रही तुझको,

मत जा ज्यादा दूर मा से,
ममता कह रही तुझको ।

 


#2 मन अशान्त पक्षी का कलरव–>>

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– A hindi poem on mother

– A hindi Kavita on Mother

Hindi Kavita on mother and son

Hindi poem on mother and son

This hindi poem on mother shows love poems in hindi and motherhood for her child all and every time. A mother is in heart always. So Read bellow the hindi poem on mother expressing the thoughts about her son.

 

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