#44-हिन्दी में भी जीवन दिखता है

वर्तमान जो मैं अगर देखूँ ,तो हिंदी में भी जीवन दिखता है,भविष्य को सोचता हुँ  जानो,पश्चिम का आगम दिखता है,यूँ दिखती है हिंदी गर्त में आगे,बहन भी इससे ऊँची दिखती,राजनीतिक स्तर  अब तय कर रहा,देख हिंदी सुबकती-सुसकती,झांक कर देखो अपना भूत ऐ दोस्तों,भाषा विकास क्रम दिखता है,जाने किस दिशा में यूँ विकास क्रम चल रहा,निश्चित उज्जवल भविष्य में अंधकार दिखता है,वर्तमान जो मैं अगर […]

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#39-कवि

#39-कवि

  • Apr 09, 2019

शब्दों को पिरोना और गूंथ देना एक माले की तरह । आसां नहीं है इस जग में,यूं शब्दों से छेंड-छांड करना,अनर्गल सी लगती हैं बातें तुरन्त,महंगा पड जाता है यूँ खिलवाड करना,शब्दों से खेलता है कवि ऐसे,फूल गूथते एक माली की तरह,बडा ही आसां लगता है उसे,शब्दों को पिरोना और गूथ देना एक माले की […]

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