#13-ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं

ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं। हरियाली मैं तुझे संजोऊँ। पीढी दर पीढी घटती जाए, मूढ कहे तू काम न आए, वो अज्ञानी तुझे मिटाए, अकेला समझाऊँ समझ न आए, मत बिसरो ऐ दुनिया, यही हरियाली प्राण बचाए। काट-काट हरियाली इस जग में, मत पहुंचाओ प्रकृति नुकशान, सब एक साथ मिलकर यह बोलो, हाँथ बढाऊँ तुझे […]

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#10-शरद बखानी

#10-शरद बखानी

  • Mar 07, 2017

पानी सरपत से सरकत जाए रे। ठंडी हवा का झोंका रोंवा कंपकंपाए रे, पानी सरपत से सरकत जाए रे। दूर तलक देखो कोई आश नहींं है, सूखा सा पडा है कोई घास नहीं है, मन से मैं बोलूं तो विश्वास नहीं है, शरद की ये वारिस से मन थिरकत जाए रे, पानी सरपत से सरकत […]

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