#12-एक कदम

#12-एक कदम

  • Mar 08, 2017

दे दिया एक कदम दुनिया भर को, अगर है दम तो बढ के दिखा एक कदम, राहों में बिछ गयी राहें खुल गए कई चौराहे, निकाल ले तू अपने लिये नई राहे हर दम। दुनिया में थे जब चन्द्र शेखर भगत, लोग थे उनकी भी आलोचना करते, अरे छोडा न बापू महात्मा को भी, आज […]

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#11-एक तरकीब

#11-एक तरकीब

  • Mar 07, 2017

मोड कितने आते हैं राह में, हैं कितनें चौराहे, हर जगह संभलना सीखें, न जाएं जिधर मन चाहे। राह चुनने की सीखो तरकीब, है यह बडी अजीब, साधो उडती भावनाओं को, है आसान तरकीब। राह जो दिखे आसान, यूँ ही न चल दो उस पर, सोंचो आने वाली दिक्कत को, हो जाओगे उस पार, काम करो […]

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#9-खयाली पुलाव

#9-खयाली पुलाव

  • Mar 07, 2017

खयाली पुलाव तो ऐसे पकते, जैसे बीरवल की खिचडी, मन में आई बात जो ठहरी, साफ दिखे हो खुली सी खिडकी। मन के उस एक झरोंखे से, निकले वो किरणें एक-एक कर, दिखे दिमाग पटल पर ऐसे, जैसे पर्दे पर प्रोजेक्टर। कहीं पुरानी याद हो ताजा, कई नए विचार भी आएं, कभी-कभी तो आए गुस्सा, […]

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